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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 25
तस्य जातु मलयस्थलीरते धूतचन्दनलतः प्रियाक्लमम् । आचचाम सलवङ्गकेसरश्चाटुकार इव दक्षिणानिलः ॥
मलय पर्वत की रमणीय भूमि में, दक्षिण वायु ने चन्दन और लवंग की सुगंध से प्रिय का क्लांत भाव दूर किया, मानो वह उसकी सेवा कर रहा हो।
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