वारणध्वनितभीतया तया कण्ठसक्तघनबाहुबन्धनः । एकपिङ्गलगिरी जगद्गुरुर्निर्विवेश विशदाः शशिप्रभाः ॥
हाथियों की ध्वनि से भयभीत होकर उसने शिव के गले को कसकर पकड़ लिया, और जगद्गुरु शिव एक पिंगल पर्वत से निकलकर चंद्रप्रकाश से युक्त स्थान में प्रविष्ट हुए।
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