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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 23
पद्मनाभचरणाङ्किताश्मसु प्राप्तवत्स्वमृतविप्प्रुषो नवाः । मन्द्रस्य कटकेषु चावसप्तार्वतीवदनपद्मषददः ॥
पद्मनाभ के चरणचिह्नों से अंकित शिलाओं पर अमृत के समान जलधाराएँ प्राप्त कर, मन्दर पर्वत के प्रदेशों में पार्वती के मुखकमल के समान शोभा फैली हुई थी।
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