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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 19
चुम्बनादलकचूर्णदूषितं शङ्करोऽपि नयनं ललाटजम् । उच्चसत्कमलगन्धये ददौ पार्वतीवदनगन्धवाहिने ॥
चुम्बन से अलकचूर्ण से युक्त हुए अपने ललाट नेत्र को शंकर ने पार्वती के मुख की सुगंध लेने वाले वायु को अर्पित किया।
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