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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 17
शिष्यतां निधुवनोपदेशिनः शङ्करस्य रहसि प्रपन्नया । शिक्षितं युवतिनैपुण्यं तया यत्तदेव गुरुदक्षिणीकृतम् ॥
शंकर के गुप्त उपदेश को ग्रहण कर, उसने जो यौवन-कला सीखी, उसी को उसने गुरु-दक्षिणा के रूप में अर्पित किया।
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