मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 14
सस्वजे प्रियमुरोनिपीडिता प्रार्थितं मुखमनेन नाहरत् । मेखलापणयलोलतां गतं हस्तमस्य शिधिले रुरोध सा ॥
उसने प्रिय को आलिंगन किया, परन्तु उसके द्वारा माँगे गए मुख को नहीं दिया, और उसकी मेखला खोलने के लिए बढ़े हाथ को भी रोक लिया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें