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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 13
वासराणि कतिचित्कथञ्चन स्थाणुना रतमकारि चानया । ज्ञातमन्मथरसा शनैः शनैः सा मुमोच रतिदुःखशीलताम् ॥
कुछ दिनों तक किसी प्रकार स्थाणु के साथ रति करने के बाद, कामरस को जानकर उसने धीरे-धीरे रति की पीड़ा को छोड़ दिया।
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