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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 11
दर्पणे च परिभोगदर्शिनी पृष्ठतः प्रणयिनो निषेदुषः । प्रेक्ष्य बिम्बमनु बिम्बमात्मनः कानि कानि न चकार लज्जया ॥
दर्पण में पीछे बैठे प्रिय के साथ अपने मिलन का प्रतिबिंब देखकर, उसने अपने ही प्रतिबिंब के अनुसार लज्जा से अनेक प्रकार की चेष्टाएँ कीं।
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