मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 94
अथ विबुधगणांस्तानिन्दुमौलिर्विसृज्य क्षितिधरपतिकन्यामाददानः करेण । कनककलशरक्षाभक्तिशोभासनाथं क्षितिविरचितशय्यं कौतुकागारमागात् ॥
तत्पश्चात् इन्दुमौलि ने देवगणों को विदा कर, पर्वतराज की पुत्री का हाथ पकड़कर, स्वर्ण कलशों से सुसज्जित, श्रद्धा से शोभित और पृथ्वी पर निर्मित शय्या वाले कौतुक गृह में प्रवेश किया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें