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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 92
देवास्तदन्ते हरमूढभार्य किरीटबद्धाञ्जलयो निपत्य । शापावसाने प्रतिपन्नमूर्त्तर्ययाचिरे पञ्चशरस्य सेवाम् ॥
उसके बाद देवता, मस्तक पर मुकुट सहित हाथ जोड़कर हर के सामने गिर पड़े और शाप के अंत में पुनः मूर्त रूप प्राप्त किए हुए कामदेव की सेवा का निवेदन करने लगे।
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