सरस्वती ने अपने द्विविध वचन से उस युगल की स्तुति की, संस्कार से पवित्र वाणी द्वारा वर को श्रेष्ठ और वधू को सुखपूर्वक ग्रहण करने योग्य बताया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।