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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 82
तदीषदार्दारुणगण्डलेखमुच्चासिकालाञ्जनरागमक्ष्णोः । वधूमुखं क्लान्तयवावर्तसमाचार धूमग्रहणाद्वभूव ॥
लाज धूम के स्पर्श से उसके मुख पर हल्की लालिमा युक्त गालों की रेखाएँ और नेत्रों में अंजन का रंग ऐसा प्रतीत हुआ मानो थके हुए यव अंकुरों का चक्र हो।
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