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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 80
तौ दम्पती त्रिः परिणीय वह्रिङ्कराग्रसंस्पर्शनिमीलिताक्षीम् । तां कारयामास वधू पुरोधास्तस्मिन्समिद्धार्चिषि लाजमोक्षम् ॥
उन दंपति ने तीन बार अग्नि की परिक्रमा की, और पुरोहित ने उस वधू से, जो अग्नि की ज्वाला के स्पर्श से नेत्र बंद किए थी, लाज होम कराया।
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