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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 77
रोमोद्गमः प्रादुरभूदुमायाः स्विन्नाङ्गुलिः पुन्नवकेतुरासीत् । वृत्तिस्तयोः पाणिसमागमेन समं विभक्तेव मनोभवस्य ॥
उमा के शरीर में रोमांच उत्पन्न हुआ, उसकी उँगलियाँ पसीने से भीग गईं, और उनके हाथ मिलाने से ऐसा लगा मानो कामदेव की वृत्ति दोनों में समान रूप से विभक्त हो गई हो।
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