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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 73
दुकूलवासाः स वधूसमीपं निन्ये विनीतैरवरोधरक्षैः । वेलासमीपं स्फुटफेनराजिर्नवैरुदन्वानिव चन्द्रपादैः ॥
दुकूल वस्त्र धारण किए हुए उसे विनीत प्रहरी वधू के समीप ले गए, जैसे चंद्र के चरणों से युक्त समुद्र अपनी फेनमालाओं सहित तट के पास आता है।
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