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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 7
सा गौरसिद्धार्थनिवेशवद्भिर्दूर्वाप्रवालैः प्रतिभिन्नरागम् । निर्नाभिकौशेयमुपात्तबाणमभ्यङ्गनेपथ्यमलञ्चकार ॥
उसने गौरी और सिद्धार्थ से युक्त, दूर्वा के कोमल अंकुरों से विविध रंगों वाला, नाभिरहित रेशमी वस्त्र धारण कर अभ्यंग और श्रृंगार किया।
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