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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 69
इत्योषधिप्रस्थविलासिनीनां शृण्वन्कथाः श्रोत्रसुखाखिनेत्रः । केयूरचूर्णीकृतलाजमुरि हिमालयस्यालयमाससाद ॥
इस प्रकार औषधिप्रस्थ की स्त्रियों की वार्ताएँ सुनते हुए, जिनकी ध्वनि कानों को सुख देती थी, वह केयूरों से चूर्णित लाज से युक्त होकर हिमालय के भवन में पहुँचा।
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