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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 67
न नूनमारूढरुषा शरीरमनेन दग्धं कुसुमायुधस्य । बीडादमुं देवमुदीक्ष्य मन्ये सन्यस्तदेहः स्वयमेव कामः ॥
निश्चय ही इसने क्रोध में कामदेव के शरीर को भस्म नहीं किया, बल्कि इस देव को देखकर लज्जा से स्वयं कामदेव ने ही अपना शरीर त्याग दिया होगा।
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