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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 66
परस्परेण स्पृहणीयशोभं न चेदिदं द्वन्द्वमयोजयिष्यत् । अस्मिन्द्वये रूपविधानयत्नः पत्युः प्रजानां विफलोऽभविश्यत् ॥
यदि यह युगल परस्पर स्पृहणीय शोभा से युक्त न होता, तो सृष्टिकर्ता का इन दोनों के रूप निर्माण का प्रयास व्यर्थ हो जाता।
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