तमेकदृश्यं नयनैः पिबन्त्यो नार्यो न जग्मुर्विषयान्तराणि । तथा हि शेषेन्द्रियवृत्तिरासां सर्वात्मना चक्षुरिव प्रविष्टा ॥
उस एक ही दृश्य को नेत्रों से पीती हुई स्त्रियाँ अन्य विषयों की ओर नहीं गईं, क्योंकि उनकी अन्य इन्द्रियों की वृत्तियाँ मानो पूर्णतः नेत्रों में ही समा गई थीं।
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