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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 63
तावत्पताकाकुलमिन्दुमौलिरुत्तोरणं राजपथं प्रपेदे । प्रासादशृङ्गाणि दिवापि कुर्वञ्ज्योत्स्नाभिषेकद्विगुणद्युतीनि ॥
तभी चंद्रमौलि ध्वजाओं से सुसज्जित मुख्य द्वार से राजमार्ग में प्रविष्ट हुआ, और महलों के शिखरों को दिन में भी चंद्रप्रकाश के अभिषेक से द्विगुणित उज्ज्वल बना रहा था।
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