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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 61
अर्धाचिता सत्वरमुत्थितायाः पदे पदे दुर्निमिते गलन्ती । कस्याश्चिदासीद्रशना तदानीमङ्गुष्ठमूलार्पितसूत्रशेषा ॥
एक स्त्री जो आधी सजी हुई ही शीघ्र उठ खड़ी हुई, उसके प्रत्येक कदम पर ढीली हुई करधनी गिरती जाती थी, और उसका शेष सूत्र केवल अंगूठे के मूल में अटका हुआ था।
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