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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 6
मैत्रे मुहूर्ते शशलाञ्छनेन योगं गतासूत्तरफल्गुनीषु तस्याः शरीरे प्रतिकर्म चक्रुर्बन्धुस्त्रियो याः पतिपुत्रवत्यः ॥
मैत्र मुहूर्त में, जब चन्द्रमा उत्तरफल्गुनी नक्षत्र में स्थित था, तब उसके शरीर पर उन स्त्रियों ने विधिपूर्वक संस्कार किए जो पति और पुत्र से संपन्न थीं।
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