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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 58
प्रसाधिकालम्बितमग्रपादमाक्षिप्य काचिद्रवरागमेव । उत्सृष्टलीलागतिरागवाक्षादलक्तकाङ्कां पदवीं ततान ॥
एक स्त्री ने प्रसाधिका द्वारा पकड़े हुए अपने पैर को झटककर, शीघ्रता से चलते हुए, अपने लाल रंग से अंकित पगचिह्नों की पंक्ति बना दी।
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