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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 56
तस्मिन्मुहूर्ते पुरसुन्दरीणामीशानसन्दर्शनलालसानाम् । प्रासादमालासु बभूवुरित्थं त्यक्तान्यकार्याणि विचेष्टितानि ॥
उस समय ईशान के दर्शन की लालसा रखने वाली नगर की स्त्रियाँ महलों की कतारों में अन्य कार्यों को छोड़कर विविध प्रकार की चेष्टाएँ करने लगीं।
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