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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 50
स प्रापदप्राप्तपराभियोगं नगेन्द्रगुप्तं नगरं मुहूर्तात् । पुरो विलग्नैर्हरदृष्टिपातैः सुवर्णसूत्रैरिव कृष्यमाणः ॥
वह शीघ्र ही पर्वतराज द्वारा सुरक्षित नगर में पहुँचा, जहाँ वह आगे बढ़ते हुए हर की दृष्टि के आकर्षण से मानो स्वर्ण सूत्रों से खींचा जा रहा था।
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