आकाश में गतिशील उसका वाहन, स्वर्ण घंटियों की ध्वनि करता हुआ, अपने सींगों से बार-बार आघात करता हुआ, मानो किनारे से टकराकर कीचड़ को हटाता हुआ उसे ले जा रहा था।
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