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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 45
तं लोकपालाः पुरुहूतमुख्याः श्रीलक्षणोत्सर्गविनीतवेषाः । दृष्टिप्रदाने कृतनन्दिसंज्ञास्तद्दर्शिताः प्राञ्जलयः प्रणेमुः ॥
इन्द्र आदि लोकपाल, अपने वैभव के चिह्न त्यागकर विनीत वेश में, नन्दी द्वारा संकेत मिलने पर, उसे देखकर हाथ जोड़कर प्रणाम करने लगे।
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