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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 39
तासां च पश्चात्कनकप्रभाणां काली कपालाभरणा चकासे । बलाकिनी नीलपयोदाजी दूरं पुरः क्षिप्तशतहदेव ॥
उन स्वर्णप्रभा युक्त स्त्रियों के पीछे काली, कपालों से भूषित, ऐसे शोभायमान थी जैसे नील मेघों के बीच उड़ती हुई बगुलों की पंक्ति दूर तक फैल गई हो।
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