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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 36
इत्यद्भुतैकप्रभवः प्रभावात्प्रसिद्धनेपथ्यविधेर्विधाता । आत्मानमासन्नगणोपनीते खन्ने निषक्तप्रतिमं ददर्श ॥
इस प्रकार अद्भुत प्रभाव से युक्त और प्रसिद्ध श्रृंगार-विधि के कर्ता ने, समीप उपस्थित गणों द्वारा लाए गए दर्पण में अपनी ही छवि को देखा।
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