जो चंद्रमा दिन में भी अपनी किरणों से प्रकाशित रहता है और बाल्यकाल से ही जिसका चिह्न प्रकट नहीं हुआ, उस चंद्र को मस्तक पर धारण करने वाले हर के लिए किसी अन्य आभूषण की क्या आवश्यकता है।
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