भस्म ही उसके शरीर का उज्ज्वल अंगराग बन गया, कपाल ही निर्मल शिरोभूषण बन गया, और अंगों के समीप रोचना के चिह्न तथा गजचर्म ही उसके वस्त्र के समान हो गए।
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