उसके कार्यों को इच्छा और वैभव के अनुरूप पूर्ण कर, पर्वतराज सभा में उपस्थित मित्रों के साथ बैठकर वृषाङ्क (शिव) के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।