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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 29
इच्छाविभूत्योरनुरूपमद्रिस्तस्याः कृती कृत्यमशेषयित्वा । सभ्यः सभायां सुहृदास्थितायां तस्थौ वृषाङ्कागमनप्रतीक्षः ॥
उसके कार्यों को इच्छा और वैभव के अनुरूप पूर्ण कर, पर्वतराज सभा में उपस्थित मित्रों के साथ बैठकर वृषाङ्क (शिव) के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे।
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