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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 26
क्षीरोदवेलेव सफेनपुञ्जा पर्याप्तचन्द्रेव शरक्त्रियामा । नवं नवक्षौमनिवासिनी सा भूयो बभौ दर्पणमादधाना ॥
वह नव वस्त्र धारण किए हुए, दर्पण को हाथ में लिए, क्षीरसागर की तरंगों के समान फेनयुक्त और पूर्ण चंद्रमा से युक्त शरद रात्रि के समान पुनः शोभायमान हुई।
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