धायिका की उँगलियों द्वारा समायोजित किया जाता हुआ ऊन का कौतुक हस्तसूत्र, उसकी चंचल दृष्टि के कारण बार-बार स्थान बदलते हुए, ठीक प्रकार से बाँधा गया।
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