अधाङ्गुलिभ्यां हरितालमार्द्र माङ्गल्यमादाय मनःशिलां च । कर्णावसक्तामलदन्तपत्रं माता तदीयं मुखमुन्नमय्य ॥
माता ने उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर, उँगलियों से हरिताल और मनःशिला से युक्त मंगल चिह्न लेकर, उसके कानों के समीप निर्मल दन्तपत्र को सजाया।
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