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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 22
आत्मानमालोक्य च शोभमानमादर्शबिम्बे स्तिमितायताक्षी । हरोपयाने त्वरिता बभूव स्त्रीणां प्रियालोकफलो हि वेषः ॥
अपने को दर्पण में शोभायमान देखकर, उसकी स्थिर और विस्तृत आँखें ठहर गईं, परंतु हर के पास जाने के लिए वह शीघ्र हो उठी, क्योंकि स्त्रियों का वेष प्रिय के दर्शन का ही फल होता है।
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