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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 14
धूपोष्मणा त्याजितमार्द्रभाव केशान्तमन्तः कुसुमं तदीयम् । पर्याक्षिपत्काचिदुदारबन्धं दृदूर्वावता पाण्डुमधूकदास्म्ना ॥
धूप की ऊष्मा से उसके केशों की आर्द्रता दूर कर, किसी ने उसके केशों में भीतर तक पुष्प सजाए और दृढ़ दूर्वा तथा श्वेत मधूक माला से उसे सुंदर रूप से बाँधा।
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