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कुमारसंभवम् • अध्याय 7 • श्लोक 11
सा मङ्गलस्नानविशुद्धगात्री गृहीतपत्युद्मनीयवस्त्रा । निर्वृत्तपर्जन्यजलाभिषेका प्रफुल्लकाशा वसुधेव रेजे ॥
वह मंगल स्नान से शुद्ध शरीर वाली, पति के योग्य वस्त्र धारण किए हुए, वर्षा जल के अभिषेक से सम्पन्न होकर, खिले हुए काश से युक्त पृथ्वी के समान शोभायमान हुई।
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