ते हिमालयमामन्त्र्य पुनः प्रेक्ष्य च शूलिनम् । सिद्धं चास्मै निवेद्यार्थं तद्विसृष्टाः खमुद्ययुः ॥
हिमालय को विदा देकर और शूलधारी शिव को प्रणाम कर वे अपने कार्य की सिद्धि का समाचार देने आकाश मार्ग से चले गए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।