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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 89
एतावदुत्क्त्वा तनयामृषीनाह महीधरः । इयं नमति वः सर्वास्त्रिलोचनवधूरिति ॥
इतना कहकर हिमालय ने मुनियों से कहा—यह आपकी त्रिलोचन की वधू आपको प्रणाम करती है।
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