एवं वादिनि देवर्षी पार्श्वे पितुरधोमुखी । लीलाकमलपत्राणि गणयामास पार्वती ॥
जब देवर्षि ऐसा कह रहे थे, तब पार्वती अपने पिता के पास लज्जित होकर कमल के पत्ते गिनने लगी।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।