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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 84
एवं वादिनि देवर्षी पार्श्वे पितुरधोमुखी । लीलाकमलपत्राणि गणयामास पार्वती ॥
जब देवर्षि ऐसा कह रहे थे, तब पार्वती अपने पिता के पास लज्जित होकर कमल के पत्ते गिनने लगी।
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