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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 83
अस्तोतुः स्तूयमानस्य वन्यस्यानन्यवन्दिनः । सुतासम्बन्धविधिना भव विश्वगुरोर्गुरुः ॥
जो स्वयं किसी की स्तुति नहीं करता, उसे अपनी पुत्री देकर आप विश्वगुरु के भी गुरु बन सकते हैं।
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