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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 82
उमा वधूर्भवान्दाता याचितार इमे वयम् । वरः शम्भुरलं ह्येष त्वत्कुलोद्भूतये विधिः ॥
उमा वधू हैं, आप दाता हैं और हम याचक; शम्भु ही योग्य वर हैं और यह आपके कुल के लिए उपयुक्त है।
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