तमर्थमिव भारत्या सुतया योक्तुमर्हसि । अशोच्या हि पितुः कन्या सद्भर्ने प्रतिपादिता ॥
तुम अपनी पुत्री को उसी के योग्य वर को सौंपो, क्योंकि योग्य पति को दी गई कन्या शोक का कारण नहीं होती।
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