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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 73
काठिन्यं स्थावरे काये भवता सर्वमर्पितम् । इदं तु भक्तिनमें ते सतामाराधनं वपुः ॥
तुमने अपने शरीर की कठोरता को त्यागकर भक्तिभाव से सज्जनों की सेवा को अपनाया है।
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