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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 56
अद्यप्रभृति भूतानामधिगम्योऽस्मि शुद्धये । यद्ध्यासितमर्हद्भिस्तद्धि तीर्थं प्रचक्षते ॥
आज से मैं सब प्राणियों के लिए शुद्धि का साधन बन गया हूँ, क्योंकि जहाँ श्रेष्ठ लोग निवास करते हैं वही तीर्थ कहलाता है।
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