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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 53
तत्र वेत्रासनासीनान्कृतासनपरिग्रहः । इत्युवाचेश्वरान्वाचं प्राञ्जलिः पृथिवीधरः ॥
वहाँ उन्हें आसन पर बैठाकर पृथ्वीधर हिमालय ने हाथ जोड़कर उनसे यह कहा।
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