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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 51
धातुताम्राधरः प्रांशुर्देवदारुबृहद्भुजः । प्रकृत्यैव शिलोरस्कः सुव्यक्तो हिमवानिति ॥
धातु के समान ताम्र अधर, ऊँचा शरीर, देवदारु के समान विशाल भुजाएँ और शिला समान वक्षस्थल से वह स्पष्ट हिमवान प्रतीत होते थे।
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