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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 49
गगनादवतीर्णा सा यथावृद्धपुरस्सरा । तोयान्तर्भास्करालीव रेजे मुनिपरम्परा ॥
आकाश से उतरती हुई वह मुनियों की पंक्ति ऐसे शोभित हुई जैसे जल में सूर्य की किरणों की पंक्ति चमकती है।
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